श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 131-132
 
 
श्लोक  1.15.131-132 
विवस्वान‍्सविता चैव मित्रो वरुण एव च।
अंशुर्भगश्चातितेजा आदित्या द्वादश स्मृता:॥ १३१॥
चाक्षुषस्यान्तरे पूर्वमासन्ये तुषिता: सुरा:।
वैवस्वतेऽन्तरे ते वै आदित्या द्वादश स्मृता:॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रथम चाक्षुष मन्वंतर में तुषित नामक देवता वैवस्वत मन्वंतर में बारह आदित्य हुए। 132॥
 
In this way, the gods named Tushit in the first Chakshusha Manvantara became the twelve Adityas in Vaivasvata Manvantara. 132॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)