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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 13
श्लोक
1.15.13
क्षोभित: स तया सार्द्धं वर्षाणामधिकं शतम्।
अतिष्ठन्मन्दरद्रोण्यां विषयासक्तमानस:॥ १३॥
अनुवाद
इससे क्रोधित होकर वे सौ वर्षों से भी अधिक समय तक मंदराचल की कंदरा में रहकर विषय-भोगों में मन लगाए रहे ॥13॥
Angered by that, he remained in Mandarachal's Kandara for more than a hundred years with his mind engrossed in sensual pleasures. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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