श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  1.15.128 
आगच्छत द्रुतं देवा अदितिं सम्प्रविश्य वै।
मन्वन्तरे प्रसूयामस्तन्न: श्रेयो भवेदिति॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! आओ, हम शीघ्र ही अदिति के गर्भ में प्रवेश करें और इस वैवस्वत मन्वन्तर में जन्म लें, इसी में हमारा हित है ॥128॥
 
"O gods! Come, let us quickly enter the womb of Aditi and take birth in this Vaivasvata Manvantara, this is in our best interest." ॥128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)