श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन  »  श्लोक 122-123
 
 
श्लोक  1.15.122-123 
हरश्च बहुरूपश्च त्र्यम्बकश्चापराजित:।
वृषाकपिश्च शम्भुश्च कपर्दी रैवत: स्मृत:॥ १२२॥
मृगव्याधश्च शर्वश्च कपाली च महामुने।
एकादशैते कथिता रुद्रास्त्रिभुवनेश्वरा:।
शतं त्वेकं समाख्यातं रुद्राणाममितौजसाम्॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! हर, बहुरूप, त्र्यंबक, अपराजित, वृषाकपि, शंभु, कपर्दि, रैवत, मृगव्याध, शर्व और कपाली- ये त्रिलोकी के अधिष्ठाता ग्यारह रुद्र कहलाते हैं। ऐसे सैकड़ों महातेजस्वी एकादश रुद्र प्रसिद्ध हैं। 122-123॥
 
Oh great sage! Hara, Bahurupa, Trimbak, Aparajit, Vrishakapi, Shambhu, Kapardi, Raivat, Mrigavyadha, Sharva and Kapali – these are called the eleven Rudras, the presiding deities of Triloki. Hundreds of such Mahatejasvi Ekadash Rudras are famous. 122-123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)