vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
»
श्लोक 12
श्लोक
1.15.12
तत्क्षोभाय सुरेन्द्रेण प्रम्लोचाख्या वराप्सरा:।
प्रयुक्ता क्षोभयामास तमृषिं सा शुचिस्मिता॥ १२॥
अनुवाद
तब इन्द्र ने उनकी तपस्या भंग करने के लिए प्रम्लोचा नाम की एक सुन्दरी अप्सरा को नियुक्त किया। उस मोहिनी स्त्री ने उन महर्षियों को व्याकुल कर दिया॥12॥
Then Indra appointed a beautiful Apsara named Pramlocha to make them lose their penance. That enchanting lady disturbed those great sages.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×