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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 103
श्लोक
1.15.103
ददौ स दश धर्माय कश्यपाय त्रयोदश।
सप्तविंशति सोमाय चतस्रोऽरिष्टनेमिने॥ १०३॥
अनुवाद
इनमें से उन्होंने दस धर्म को, तेरह कश्यप को, सत्ताईस सोम (चंद्रमा) को और चार अरिष्टनेमिक को दिए।
Of these he gave ten to Dharma, thirteen to Kasyapa, twenty-seven to Som (Moon) and four to Arishtanemika.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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