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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 101
श्लोक
1.15.101
तांश्चापि नष्टान् विज्ञाय पुत्रान्दक्ष: प्रजापति:।
क्रोधं चक्रे महाभागो नारदं स शशाप च॥ १०१॥
अनुवाद
उन पुत्रों को भी चला गया जानकर महाबली दक्ष प्रजापति नारदजी पर अत्यन्त क्रोधित हुए और उन्हें शाप दे दिया ॥101॥
Knowing that those sons were also gone, the great Daksha Prajapati became very angry with Narada and cursed him. ॥101॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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