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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 15: प्रचेताओंका मारिषा नामक कन्याके साथ विवाह, दक्ष प्रजापतिकी उत्पत्ति एवं दक्षकी आठ कन्याओंके वंशका वर्णन
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श्लोक 100
श्लोक
1.15.100
तत: प्रभृति वै भ्राता भ्रातुरन्वेषणे द्विज।
प्रयातो नश्यति तथा तन्न कार्यं विजानता॥ १००॥
अनुवाद
तब से यदि कोई भाई अपने भाई को खोजने जाए तो उसका नाश हो जाता है। इसलिए बुद्धिमान पुरुष को ऐसा नहीं करना चाहिए॥100॥
Since then if a brother goes to search for his brother, he is destroyed. Therefore a wise man should not do so.॥ 100॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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