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vishnu 1.14.40: जो स्थान स्पर्श, गंध और रस से रहित है, तथा नेत्र और कान से रहित है, वह अचल है तथा जिह्वा, हाथ और मन से रहित है ॥40॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.14.40 
अनाकाशमसंस्पर्शमगन्धमरसं च यत्।
अचक्षुश्रोत्रमचलमवाक्पाणिममानसम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जो स्थान स्पर्श, गंध और रस से रहित है, तथा नेत्र और कान से रहित है, वह अचल है तथा जिह्वा, हाथ और मन से रहित है ॥40॥
 
That space which is devoid of touch, smell and taste, and is devoid of eyes and ears, is immovable and is devoid of tongue, hands and mind. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)