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vishnu 1.14.38: जो अपरिवर्तनशील, अजन्मा, शुद्ध, निर्गुण, निर्मल और श्रीविष्णु का परम धाम है, उस ब्रह्मा रूप को हम नमस्कार करते हैं॥38॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.14.38 
अविकारमजं शुद्धं निर्गुणं यन्निरञ्जनम्।
नता: स्म तत्परं ब्रह्म विष्णोर्यत्परमं पदम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो अपरिवर्तनशील, अजन्मा, शुद्ध, निर्गुण, निर्मल और श्रीविष्णु का परम धाम है, उस ब्रह्मा रूप को हम नमस्कार करते हैं॥38॥
 
We bow to that form of Brahma who is unchangeable, unborn, pure, attributeless, clean and the supreme abode of Sri Vishnu. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)