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vishnu 1.14.35: जो इन्द्रियों द्वारा देखे जाने वाले विषयों को आत्मा के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, उन अन्तरात्मारूपी विश्वात्मा को नमस्कार है ॥35॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.14.35 
गृहीतानिन्द्रियैरर्थानात्मने य: प्रयच्छति।
अन्त:करणरूपाय तस्मै विश्वात्मने नम:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो इन्द्रियों द्वारा देखे जाने वाले विषयों को आत्मा के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, उन अन्तरात्मारूपी विश्वात्मा को नमस्कार है ॥35॥
 
Salutations to the Universal Soul in the form of the inner conscience who presents before the soul the objects perceived by the senses. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)