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vishnu 1.14.34: जो ससीम एवं अपरिवर्तनशील इन्द्रियों के रूप में शाश्वत विषयों को ग्रहण करते हैं, उन ज्ञान के मूल हरि को नमस्कार है॥ 34॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.14.34 
गृह्णाति विषयान्नित्यमिन्द्रियात्मा क्षराक्षर:।
यस्तस्मै ज्ञानमूलाय नता: स्म हरिमेधसे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जो ससीम एवं अपरिवर्तनशील इन्द्रियों के रूप में शाश्वत विषयों को ग्रहण करते हैं, उन ज्ञान के मूल हरि को नमस्कार है॥ 34॥
 
Salutations to Hari, the root of knowledge, who accepts the eternal objects in the form of the finite and immutable senses. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)