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vishnu 1.14.24-25: जो आदि ज्योतिस्वरूप, अतुलनीय, सूक्ष्म, अनंत, असीम और समस्त जड़-चेतन वस्तुओं के कारण हैं, तथा दिन, रात और संध्या जिनके आदि रूप हैं, उन निराकार परब्रह्म परमेश्वर को नमस्कार है॥24-25॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  1.14.24-25 
ज्योतिराद्यमनौपम्यमण्वनन्तमपारवत्।
योनिभूतमशेषस्य स्थावरस्य चरस्य च॥ २४॥
यस्याह: प्रथमं रूपमरूपस्य तथा निशा।
सन्ध्या च परमेशस्य तस्मै कालात्मने नम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो आदि ज्योतिस्वरूप, अतुलनीय, सूक्ष्म, अनंत, असीम और समस्त जड़-चेतन वस्तुओं के कारण हैं, तथा दिन, रात और संध्या जिनके आदि रूप हैं, उन निराकार परब्रह्म परमेश्वर को नमस्कार है॥24-25॥
 
Salutations to that God who is the primal form of light, incomparable, minute, infinite, boundless and the cause of all animate and inanimate objects, and whose first forms are day, night and evening, that formless Supreme Being. ॥24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)