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vishnu 1.14.19-20: हे महामुनि! संसार के आश्रय जगत्पति श्री नारायण में मन लगाकर वे वहाँ (जल में) दस हजार वर्षों तक रहे और एकाग्र मन से देवाधिदेव श्री हरि की स्तुति की, जो स्तुति करने पर स्तुति करने वालों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं॥19-20॥   |   vishnu अध्याय 1.14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 14: प्राचीनबर्हिका जन्म और प्रचेताओंका भगवदाराधन  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  1.14.19-20 
दशवर्षसहस्राणि न्यस्तचित्ता जगत्पतौ।
नारायणे मुनिश्रेष्ठ सर्वलोकपरायणे॥ १९॥
तत्रैवावस्थिता देवमेकाग्रमनसो हरिम्।
तुष्टुवुर्यस्स्तुत: कामान् स्तोतुरिष्टान्प्रयच्छति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! संसार के आश्रय जगत्पति श्री नारायण में मन लगाकर वे वहाँ (जल में) दस हजार वर्षों तक रहे और एकाग्र मन से देवाधिदेव श्री हरि की स्तुति की, जो स्तुति करने पर स्तुति करने वालों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं॥19-20॥
 
Oh great sage! With his mind fixed on the worldly refuge, Jagatpati Shri Narayan, he stayed there (in the water) for ten thousand years and praised Devadhidev Shri Hari with a concentrated mind, who, when he is praised, fulfills all the wishes of those who praise him. 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)