श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  1.13.94 
य इदं जन्म वैन्यस्य पृथो: संकीर्त्तयेन्नर:।
न तस्य दुष्कृतं किञ्चित्फलदायि प्रजायते॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
जो महाराज पृथु की कथाओं का कीर्तन करता है, उसका कोई भी पाप कर्म फल नहीं देता ॥ 94॥
 
He who chants the tales of Maharaja Prithu, none of his evil deeds bear any fruit. ॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)