श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 90-91
 
 
श्लोक  1.13.90-91 
ततश्च देवैर्मुनिभिर्दैत्यै रक्षोभिरद्रिभि:।
गन्धर्वैरुरगैर्यक्षै: पितृभिस्तरुभिस्तथा॥ ९०॥
तत्तत्पात्रमुपादाय तत्तद्दुग्धं मुने पय:।
वत्सदोग्धृविशेषाश्च तेषां तद्योनयोऽभवन्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
हे मुने ! तब देवताओं, ऋषियों, दानवों, राक्षसों, पर्वतों, गन्धर्वों, नागों, यक्षों और पितर आदि ने अपने-अपने पात्रों में अपने-अपने मतानुसार दूध दुहा और दूध दुहने वालों के अनुसार उनके ही सम्बन्धी दोग्धा और वत्स आदि हुए ॥90-91॥
 
Hey Mune! Then the gods, sages, demons, demons, mountains, Gandharvas, snakes, Yakshas and ancestors etc. milked the milk of their own opinion in their respective vessels and according to the milkers, their own relatives became Dogdha and Vatsa etc. 90-91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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