vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र
»
श्लोक 77
श्लोक
1.13.77
श्रीपराशर उवाच
तत: प्रणम्य वसुधा तं भूय: प्राह पार्थिवम्।
प्रवेपिताङ्गी परमं साध्वसं समुपागता॥ ७७॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - तब अत्यन्त भयभीत और काँपती हुई पृथ्वी ने पुनः पृथ्वी के पति को प्रणाम करके कहा ॥77॥
Shri Parasharji said - Then the very frightened and trembling earth again saluted the husband of the earth and said. 77॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×