श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.13.77 
श्रीपराशर उवाच
तत: प्रणम्य वसुधा तं भूय: प्राह पार्थिवम्।
प्रवेपिताङ्गी परमं साध्वसं समुपागता॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - तब अत्यन्त भयभीत और काँपती हुई पृथ्वी ने पुनः पृथ्वी के पति को प्रणाम करके कहा ॥77॥
 
Shri Parasharji said - Then the very frightened and trembling earth again saluted the husband of the earth and said. 77॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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