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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र
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श्लोक 76
श्लोक
1.13.76
पृथुरुवाच
त्वां हत्वा वसुधे बाणैर्मच्छासनपराङ्मुखीम्।
आत्मयोगबलेनेमा धारयिष्याम्यहं प्रजा:॥ ७६॥
अनुवाद
पृथु ने कहा - हे वसुधे! मेरी आज्ञा का उल्लंघन करने वाले तुझे मैं मार डालूँगा और अपनी योगशक्ति से इन लोगों का पालन-पोषण करूँगा।
Prithu said - O Vasudhe! I will kill you who has violated my command and will sustain these people by my yogic powers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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