श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.13.67 
प्रजा ऊचु:
अराजके नृपश्रेष्ठ धरित्र्या सकलौषधी:।
ग्रस्तास्तत: क्षयं यान्ति प्रजा: सर्वा: प्रजेश्वर॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
प्रजाजनों ने कहा - हे राजाओं में श्रेष्ठ प्रजापति! अराजकता के समय पृथ्वी ने समस्त औषधियों को सोख लिया है, इसलिए आपकी समस्त प्रजा दुर्बल हो रही है॥67॥
 
The people said - O Prajapati, the best of kings! In the times of anarchy, the earth has absorbed all the medicines, therefore your entire population is becoming weak. ॥ 67॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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