|
| |
| |
श्लोक 1.13.64  |
सूतेनोक्तान् गुणानित्थं स तदा मागधेन च।
चकार हृदि तादृक् च कर्मणा कृतवानसौ॥ ६४॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| इस प्रकार उसने सूत और मागध द्वारा कहे गए गुणों को अपने मन में धारण किया और वैसे ही कर्म किए ॥ 64॥ |
| |
| In this manner he imbibed in his mind the qualities mentioned by Suta and Magadha and performed similar acts. ॥ 64॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|