श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  1.13.64 
सूतेनोक्तान् गुणानित्थं स तदा मागधेन च।
चकार हृदि तादृक् च कर्मणा कृतवानसौ॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उसने सूत और मागध द्वारा कहे गए गुणों को अपने मन में धारण किया और वैसे ही कर्म किए ॥ 64॥
 
In this manner he imbibed in his mind the qualities mentioned by Suta and Magadha and performed similar acts. ॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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