श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.13.61 
सत्यवाग्दानशीलोऽयं सत्यसन्धो नरेश्वर:।
ह्रीमान्मैत्र: क्षमाशीलो विक्रान्तो दुष्टशासन:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
[उसने कहा-] 'यह राजा सत्यवादी, दानशील, सत्यनिष्ठ, विनयशील, दयालु, क्षमाशील, पराक्रमी और दुष्टों का दमन करनेवाला है ॥61॥
 
[He said –] 'This king is truthful, charitable, truthful, modest, kind-hearted, forgiving, valiant and suppresses the wicked. 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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