श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.13.59 
यदिमौ वर्जनीयं च किञ्चिदत्र वदिष्यत:।
तदहं वर्जयिष्यामीत्येवं चक्रे मतिं नृप:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
यदि वे मुझे यहाँ त्यागने योग्य कुछ गुणों के विषय में बताएँ तो मैं उनका त्याग कर दूँगा ।’ इस प्रकार राजा ने मन में निश्चय किया ॥59॥
 
If they tell me about some of the qualities that should be discarded here, then I will abandon them.' Thus the king decided in his mind. 59॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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