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श्लोक 1.13.59  |
यदिमौ वर्जनीयं च किञ्चिदत्र वदिष्यत:।
तदहं वर्जयिष्यामीत्येवं चक्रे मतिं नृप:॥ ५९॥ |
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| अनुवाद |
| यदि वे मुझे यहाँ त्यागने योग्य कुछ गुणों के विषय में बताएँ तो मैं उनका त्याग कर दूँगा ।’ इस प्रकार राजा ने मन में निश्चय किया ॥59॥ |
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| If they tell me about some of the qualities that should be discarded here, then I will abandon them.' Thus the king decided in his mind. 59॥ |
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