श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.13.57 
श्रीपराशर उवाच
तत: स नृपतिस्तोषं तच्छ्रुत्वा परमं ययौ।
सद‍्गुणै: श्लाघ्यतामेति तस्माल्लभ्या गुणा मम॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - यह सुनकर राजा को भी बहुत संतोष हुआ; उसने सोचा कि 'मनुष्य अपने गुणों के कारण ही प्रशंसा के योग्य होता है; अतः मुझे भी अच्छे गुणों को धारण करना चाहिए॥ 57॥
 
Shri Parashar Ji said - On hearing this the king too felt very satisfied; he thought 'A man is worthy of praise only because of his good qualities; hence I too should acquire good qualities.॥ 57॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd