श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.13.56 
ऋषय ऊचु:
करिष्यत्येष यत्कर्म चक्रवर्ती महाबल:।
गुणा भविष्या ये चास्य तैरयं स्तूयतां नृप:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा : ये महाबली चक्रवर्ती महाराज भविष्य में जो भी कर्म करेंगे तथा इनमें जो भी गुण होंगे, उन्हीं के आधार पर तुम इनकी स्तुति करो ॥ 56॥
 
The sages said: Whatever deeds this mighty Chakravarti Maharaja will perform in the future and whatever future qualities he will possess, you should praise him on the basis of those. ॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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