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श्लोक 1.13.56  |
ऋषय ऊचु:
करिष्यत्येष यत्कर्म चक्रवर्ती महाबल:।
गुणा भविष्या ये चास्य तैरयं स्तूयतां नृप:॥ ५६॥ |
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| अनुवाद |
| ऋषियों ने कहा : ये महाबली चक्रवर्ती महाराज भविष्य में जो भी कर्म करेंगे तथा इनमें जो भी गुण होंगे, उन्हीं के आधार पर तुम इनकी स्तुति करो ॥ 56॥ |
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| The sages said: Whatever deeds this mighty Chakravarti Maharaja will perform in the future and whatever future qualities he will possess, you should praise him on the basis of those. ॥ 56॥ |
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