श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.13.53 
स्तूयतामेष नृपति: पृथुर्वैन्य: प्रतापवान‍्।
कर्मैतदनुरूपं वां पात्रं स्तोत्रस्य चापरम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
‘आप इन तेजस्वी वेनपुत्र महाराज पृथ्वी की स्तुति करें। यह आपके योग्य कार्य है और राजा भी स्तुति के योग्य हैं। 53॥
 
‘You praise this glorious Venaputra Maharaj Prithvi. This is the work worthy of you and the king is also worthy of praise. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)