vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र
»
श्लोक 48
श्लोक
1.13.48
पित्राऽपरञ्जितास्तस्य प्रजास्तेनानुरञ्जिता:।
अनुरागात्ततस्तस्य नाम राजेत्यजायत॥ ४८॥
अनुवाद
जिन लोगों को उसके पिता ने दुःखी किया था, उन्हें उसने सुखी कर दिया, इसलिए उसकी प्रसन्नता के कारण वह 'राजा' कहलाया। 48.
The people whom his father had made unhappy, he made them happy, hence due to his happiness he was called 'Raja'. 48.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×