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श्लोक 1.13.44  |
पितामहश्च भगवान्देवैराङ्गिरसै: सह।
स्थावराणि च भूतानि जङ्गमानि च सर्वश:।
समागम्य तदा वैन्यमभ्यसिञ्चन्नराधिपम्॥ ४४॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय भगवान ब्रह्माजी ने अंगिरस देवताओं तथा सम्पूर्ण स्थावर-जंगम प्राणियों के साथ वहाँ आकर महाराज वैनय (वेन के पुत्र) का राजा के रूप में अभिषेक किया ॥ 44॥ |
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| At that time Lord Brahma along with the Angiras gods and all the mobile and immobile creatures came there and anointed Maharaja Vainay (son of Vena) as the king. ॥ 44॥ |
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