श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.13.44 
पितामहश्च भगवान‍्देवैराङ्गिरसै: सह।
स्थावराणि च भूतानि जङ्गमानि च सर्वश:।
समागम्य तदा वैन्यमभ्यसिञ्चन्नराधिपम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस समय भगवान ब्रह्माजी ने अंगिरस देवताओं तथा सम्पूर्ण स्थावर-जंगम प्राणियों के साथ वहाँ आकर महाराज वैनय (वेन के पुत्र) का राजा के रूप में अभिषेक किया ॥ 44॥
 
At that time Lord Brahma along with the Angiras gods and all the mobile and immobile creatures came there and anointed Maharaja Vainay (son of Vena) as the king. ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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