vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र
»
श्लोक 43
श्लोक
1.13.43
तं समुद्राश्च नद्यश्च रत्नान्यादाय सर्वश:।
तोयानि चाभिषेकार्थं सर्वाण्येवोपतस्थिरे॥ ४३॥
अनुवाद
महाराज पृथु के अभिषेक के लिए सभी समुद्र और नदियाँ सभी प्रकार के रत्न और जल लेकर उपस्थित हुए।
For the anointment of Maharaja Prithu, all the oceans and rivers presented themselves with all kinds of gems and water. 43.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×