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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र
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श्लोक 37
श्लोक
1.13.37
तेन द्वारेण तत्पापं निष्क्रान्तं तस्य भूपते:।
निषादास्ते ततो जाता वेनकल्मषनाशना:॥ ३७॥
अनुवाद
राजा वेन के समस्त पाप निषाद रूप में उस द्वार से दूर हो गए, अतः निषादगण उनके पापों का नाश करने वाले हुए ॥37॥
All the sins of King Vena went away from that door in the form of Nishad. Hence, Nishadhagan became the destroyer of their sins. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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