श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.13.30 
ततश्च मुनयो रेणुं ददृशु: सर्वतो द्विज।
किमेतदिति चासन्नान‍्पप्रच्छुस्ते जनांस्तदा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! तत्पश्चात् उन मुनियों ने सब ओर से बहुत-सी धूल उड़ती देखी और उसे देखकर अपने आस-पास के लोगों से पूछा - "यह क्या है?"॥30॥
 
O Dwija! Thereafter those sages saw a lot of dust rising from all sides. Seeing it they asked the people around them - "What is this?"॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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