श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  1.13.21-22 
ब्रह्मा जनार्दन: शम्भुरिन्द्रो वायुर्यमो रवि:।
हुतभुग्वरुणो धाता पूषा भूमिर्निशाकर:॥ २१॥
एते चान्ये च ये देवा: शापानुग्रहकारिण:।
नृपस्यैते शरीरस्था: सर्वदेवमयो नृप:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, इन्द्र, वायु, यम, सूर्य, अग्नि, वरुण, धाता, पूषा, पृथ्वी और चन्द्रमा तथा इनके अतिरिक्त जो भी अन्य देवता शाप और वरदान देने में समर्थ हैं, वे सब राजा के शरीर में निवास करते हैं, इस प्रकार राजा सर्वज्ञ होता है ॥21-22॥
 
Brahma, Vishnu, Mahadev, Indra, Vayu, Yama, Surya, Agni, Varun, Dhata, Pusha, Earth and Moon and apart from these, all the other gods who are capable of cursing and blessing all reside in the body of the king, thus the king is omniscient. 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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