श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.13.20 
वेन उवाच
मत्त: कोऽभ्यधिकोऽन्योऽस्ति कश्चाराध्यो ममापर:।
कोऽयं हरिरिति ख्यातो यो वोय ज्ञेश्वरो मत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वेन बोले- मुझसे बड़ा और मेरे द्वारा भी पूजनीय कौन है? वह कौन है जिसे आप यज्ञेश्वर (यज्ञ का देवता) मानते हैं, जो 'हरि' कहलाते हैं?॥20॥
 
Ven said— Who is greater than me and who is worthy of worship even by me? Who is the one whom you consider to be Yajneshwar (the deity of Yajna) who is called 'Hari'?॥20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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