श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.13.16 
ऋषय ऊचु:
भो भो राजन् शृणुष्व त्वं यद्वदाम महीपते।
राज्यदेहोपकाराय प्रजानां च हितं परम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा, 'हे राजन! हे पृथ्वी के स्वामी! अपने राज्य और शरीर के हित के लिए तथा अपनी प्रजा के कल्याण के लिए हम जो कुछ कहना चाहते हैं, उसे सुनिए।'
 
The sages said, 'O King! O Lord of the Earth! Listen to what we have to say for the benefit of your kingdom and body as well as for the welfare of your subjects.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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