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श्लोक 1.13.15  |
ततस्तमृषय: पूर्वं सम्पूज्य पृथिवीपतिम्।
ऊचु: सामकलं वाक्यं मैत्रेय समुपस्थिता:॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| हे मैत्रेय! तब ऋषियों ने पृथ्वी के स्वामी भगवान के पास जाकर पहले उनकी बहुत स्तुति की तथा मधुर एवं सान्त्वनापूर्ण वचन बोले। |
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| O Maitreya! Then the sages went to the Lord of the Earth and first praised him a lot and spoke in sweet and consoling words. |
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