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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र
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श्लोक 15
श्लोक
1.13.15
ततस्तमृषय: पूर्वं सम्पूज्य पृथिवीपतिम्।
ऊचु: सामकलं वाक्यं मैत्रेय समुपस्थिता:॥ १५॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! तब ऋषियों ने पृथ्वी के स्वामी भगवान के पास जाकर पहले उनकी बहुत स्तुति की तथा मधुर एवं सान्त्वनापूर्ण वचन बोले।
O Maitreya! Then the sages went to the Lord of the Earth and first praised him a lot and spoke in sweet and consoling words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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