श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 13: राजा वेन और पृथुका चरित्र  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.13.10 
श्रीमैत्रेय उवाच
किमर्थं मथित: पाणिर्वेनस्य परमर्षिभि:।
यत्र जज्ञे महावीर्य: स पृथुर्मुनिसत्तम॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे महामुने! जिन महाबली पृथु का जन्म हुआ, उन महामुनियों ने वेन के हाथों का मंथन क्यों किया?
 
Shri Maitreyaji said – O great sage! Why did the great sages churn the hands of Ven from which the mighty Prithu was born? 10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd