vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
»
श्लोक 83
श्लोक
1.12.83
त्वमासीर्ब्राह्मण: पूर्वं मय्येकाग्रमति: सदा।
मातापित्रोश्च शुश्रूषुर्निजधर्मानुपालक:॥ ८३॥
अनुवाद
पूर्वजन्म में तुम ब्राह्मण थे और मुझमें ही निरन्तर लगे रहते थे, माता-पिता के सेवक और स्वधर्म के अनुयायी थे ॥83॥
In your previous birth, you were a Brahmin and in me you were always focused, a servant of your parents and a follower of your own religion. 83॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×