श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान‍्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.12.83 
त्वमासीर्ब्राह्मण: पूर्वं मय्येकाग्रमति: सदा।
मातापित्रोश्च शुश्रूषुर्निजधर्मानुपालक:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
पूर्वजन्म में तुम ब्राह्मण थे और मुझमें ही निरन्तर लगे रहते थे, माता-पिता के सेवक और स्वधर्म के अनुयायी थे ॥83॥
 
In your previous birth, you were a Brahmin and in me you were always focused, a servant of your parents and a follower of your own religion. 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)