vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
»
श्लोक 76
श्लोक
1.12.76
वरं वरय तस्मात्त्वं यथाभिमतमात्मन:।
सर्वं सम्पद्यते पुंसां मयि दृष्टिपथं गते॥ ७६॥
अनुवाद
अतः जो भी वर चाहो मांग लो। मेरा दर्शन पाकर मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है। 76.
Therefore ask for any boon you desire. After seeing me a man can obtain everything. 76.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×