vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
»
श्लोक 73
श्लोक
1.12.73
सर्वात्मन्सर्वभूतेश सर्वसत्त्वसमुद्भव।
सर्वभूतो भवान्वेत्ति सर्वसत्त्वमनोरथम्॥ ७३॥
अनुवाद
हे परमात्मा! हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! हे सम्पूर्ण भूतों के मूलस्थान! आप सर्वव्यापी स्वरूप से सम्पूर्ण प्राणियों की इच्छाओं को जानने वाले हैं ॥73॥
Oh Supreme Soul! O Almighty God! O the original place of all ghosts! You know the desires of all living beings from the omnipresent form. 73॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×