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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
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श्लोक 7
श्लोक
1.12.7
अनन्यचेतसस्तस्य ध्यायतो भगवान्हरि:।
सर्वभूतगतो विप्र सर्वभावगतोऽभवत्॥ ७॥
अनुवाद
इस प्रकार हे विप्र! अनन्य मन से ध्यान करने पर सर्वव्यापी भगवान् हरि अपनी सम्पूर्ण शक्ति सहित उसके हृदय में प्रकट हो गए॥7॥
In this way O Vipra! By meditating with an undivided mind, Lord Hari, the omnipresent Lord, appeared in his heart with all his might. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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