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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
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श्लोक 51
श्लोक
1.12.51
ध्रुव उवाच
भूमिरापोऽनलो वायु: खं मनो बुद्धिरेव च।
भूतादिरादिप्रकृतिर्यस्य रूपं नतोऽस्मि तम्॥ ५१॥
अनुवाद
ध्रुव बोले - "मैं उन भगवान् को नमस्कार करता हूँ जिनके स्वरूप पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि, अहंकार और मूल प्रकृति हैं।" ॥51॥
Dhruva said, "I bow to the Lord whose forms are earth, water, fire, air, sky, mind, intellect, ego and the original nature." ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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