श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान‍्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.12.40 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्ता देवदेवेन प्रणम्य त्रिदशास्तत:।
प्रययु: स्वानि धिष्ण्यानि शतक्रतुपुरोगमा:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - देवाधिदेव भगवान के ऐसा कहने पर इन्द्र आदि सब देवता उन्हें प्रणाम करके अपने-अपने स्थान को चले गए ॥40॥
 
Shri Parasharji said - On God Devadhidev saying this, all the gods like Indra bowed to him and went to their respective places. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)