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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
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श्लोक 28
श्लोक
1.12.28
ततो नानाविधान्नादान् सिंहोष्ट्रमकरानना:।
त्रासाय राजपुत्रस्य नेदुस्ते रजनीचरा:॥ २८॥
अनुवाद
तब सिंह, ऊँट और मकर आदि मुखवाले वे राक्षस राजा के पुत्र को जीवन देने के लिए नाना प्रकार से गर्जना करने लगे॥28॥
Then those demons with faces like lion, camel and capricorn etc. started roaring in various ways to give life to the king's son. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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