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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 12: ध्रुवकी तपस्यासे प्रसन्न हुए भगवान्का आविर्भाव और उसे ध्रुवपद-दान
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श्लोक 103
श्लोक
1.12.103
स्थानभ्रंशं न चाप्नोति दिवि वा यदि वा भुवि।
सर्वकल्याणसंयुक्तो दीर्घकालं स जीवति॥ १०३॥
अनुवाद
वह चाहे स्वर्ग में रहे या पृथ्वी पर, अपने स्थान से कभी नहीं हिलता और समस्त शुभताओं से युक्त होकर दीर्घकाल तक जीवित रहता है ॥103॥
Whether he lives in heaven or on earth, he never moves from his place and remains alive for a long time, being filled with all auspiciousness. ॥103॥
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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