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vishnu 1.11.9: यह सिंहासन जो समस्त चक्रवर्ती राजाओं का निवास है, मेरे पुत्र के लिए ही उपयुक्त है; तू व्यर्थ ही अपने मन को क्यों व्याकुल करता है? ॥9॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.11.9 
एतद्राजासनं सर्वभूभृत्संश्रयकेतनम्।
योग्यं ममैव पुत्रस्य किमात्मा क्लिश्यते त्वया॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यह सिंहासन जो समस्त चक्रवर्ती राजाओं का निवास है, मेरे पुत्र के लिए ही उपयुक्त है; तू व्यर्थ ही अपने मन को क्यों व्याकुल करता है? ॥9॥
 
This throne which is the abode of all the Chakravarti kings is fit only for my son; why do you unnecessarily trouble your mind? ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)