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vishnu 1.11.8: तू मूर्ख है, इसीलिए ऐसी अप्राप्य और उत्तम वस्तु की इच्छा कर रहा है। यह सत्य है कि तू इस राजा का पुत्र है, परन्तु तू मेरे गर्भ में नहीं था!॥8॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.11.8 
उत्तमोत्तममप्राप्यमविवेको हि वाञ्छसि।
सत्यं सुतस्त्वमप्यस्य किन्तु न स्वं मया धृत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तू मूर्ख है, इसीलिए ऐसी अप्राप्य और उत्तम वस्तु की इच्छा कर रहा है। यह सत्य है कि तू इस राजा का पुत्र है, परन्तु तू मेरे गर्भ में नहीं था!॥8॥
 
You are foolish and that is why you desire such an unobtainable and excellent thing. It is true that you are the son of this king, but I did not conceive you in my womb! ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)