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vishnu 1.11.53: मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन को समस्त बाह्य विषयों से हटाकर केवल उसी पर स्थिर करे जो जगत का आधार है ॥ 53॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.11.53 
बाह्यार्थादखिलाच्चित्तं त्याजयेत्प्रथमं नर:।
तस्मिन्नेव जगद्धाम्नि तत:कुर्वीत निश्चलम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह अपने मन को समस्त बाह्य विषयों से हटाकर केवल उसी पर स्थिर करे जो जगत का आधार है ॥ 53॥
 
One must first withdraw one's mind from all external objects and fix it solely on that which is the support of the universe. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)