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vishnu 1.11.47: पुलह ने कहा - हे सुव्रत! यज्ञ के स्वामी भगवान विष्णु की पूजा करो, जिनकी पूजा से भगवान इन्द्र ने इन्द्रपद का परम पद प्राप्त किया है ॥47॥   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.11.47 
पुलह उवाच
ऐन्द्रमिन्द्र: परं स्थानं यमाराध्य जगत्पतिम्।
प्राप यज्ञपतिं विष्णुं तमाराधय सुव्रत॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
पुलह ने कहा - हे सुव्रत! यज्ञ के स्वामी भगवान विष्णु की पूजा करो, जिनकी पूजा से भगवान इन्द्र ने इन्द्रपद का परम पद प्राप्त किया है ॥47॥
 
Pulah said – O Suvrat! Worship Lord Vishnu, the master of sacrifice, by whose worship Lord Indra has attained the supreme status of Indrapad. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)