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vishnu 1.11.43: मरीचि बोले - हे राजन्! गोविन्द की पूजा किए बिना मनुष्य उस परम पद को प्राप्त नहीं कर सकता; अतः तुम्हें श्री अच्युत की पूजा करनी चाहिए।   |   vishnu अध्याय 1.11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 11: ध्रुवका वनगमन और मरीचि आदि ऋषियोंसे भेंट  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.11.43 
मरीचिरुवाच
अनाराधितगोविन्दैर्नरै: स्थानं नृपात्मज।
न हि सम्प्राप्यते श्रेष्ठं तस्मादाराधयाच्युतम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मरीचि बोले - हे राजन्! गोविन्द की पूजा किए बिना मनुष्य उस परम पद को प्राप्त नहीं कर सकता; अतः तुम्हें श्री अच्युत की पूजा करनी चाहिए।
 
Marichi said - O Prince! Without worshipping Govinda a man cannot attain that supreme position; therefore you should worship Sri Achyuta. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)