श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 10: भृगु, अग्नि और अग्निष्वात्तादि पितरोंकी सन्तानका वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.10.3-4 
आयतिर्नियतिश्चैव मेरो: कन्ये महात्मन:।
भार्ये धातृविधात्रोस्ते तयोर्जातौ सुतावुभौ॥ ३॥
प्राणश्चैव मृकण्डुश्च मार्कण्डेयो मृकण्डुत:।
ततो वेदशिरा जज्ञे प्राणस्यापि सुतं शृणु॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महात्मा मेरु की आती और नियति नामक कन्याएँ धाता और विधाता की पत्नियाँ थीं; उनसे प्राण और मृकण्डु नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। मृकण्डु से मकर्देय और उनसे वेदशिरा उत्पन्न हुए। अब प्राणकी संतानों का वर्णन सुनो॥3-4॥
 
Mahatma Meru's daughters named Aaati and Niyati were the wives of Dhaata and Vidhaata; From her he had two sons named Pran and Mrikandu. From Mrikandus was born Makardeya and from him Vedshira. Now listen to the description of Pranki's children. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)