पितरो ब्रह्मणा सृष्टा व्याख्याता ये मया द्विज।
अग्निष्वात्ता बर्हिषदोऽनग्नय: साग्नयश्च ये॥ १८॥
तेभ्य: स्वधा सुते जज्ञे मेनां वै धारिणीं तथा।
ते उभे ब्रह्मवादिन्यौ योगिन्यावप्युभे द्विज॥ १९॥
उत्तमज्ञानसम्पन्ने सर्वै: समुदितैर्गुणै:॥ २०॥
अनुवाद
हे द्विज! मैंने तुम्हें ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न अनाग्निक अग्निश्वत्ता और साग्निक बर्हिषद आदि पितरों के विषय में बताया था। उनसे स्वधाने ने मेना और धारिणी नामक दो पुत्रियों को जन्म दिया। वे दोनों ब्रह्मवादिनी और योगिनी थीं, उत्तम ज्ञान से युक्त और सर्वगुण संपन्न थीं। 18-20
Hey Dwija! I told you about the ancestors like Anagnik Agnishwatta and Sagnik Barhishad etc. created by Lord Brahma. From him Swadhaane gave birth to two daughters named Mena and Dharini. Both of them were Brahmavadini and Yogini, full of excellent knowledge and possessing all the virtues. 18-20
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥